नेवरा में चल रही भागवत कथा के दूसरे दिन शनिवार को भागवत कथा में संत सियाराम ने कहा कि मृत्यु सारस्वत व अटल उससे भय कैसा है। जिसने जन्म लिया है। उसको मरना पड़ेगा। संत सिया राम ने परीक्षित उद्धार की कहानी को विस्तार से बताते हुए कहा कि जीवन में हमें हर परिस्थितियों से मुकाबला करने के लिए प्रयासरत रहना चाहिए। जिस जीवन में संघर्ष नहीं होता वो जीवन हमेशा निरर्थक ही माना जाता है, इसलिए हमें हमारे जीवन को परहित में लगाने का प्रयास करना चाहिए। इससे जीवन को एक नवीन दिशा मिल सकें। संत ने भागवत कथा में आए एक प्रसंग में बताया कि हमें बच्चो को संस्कारवान बनने की प्रेरणा देनी चाहिए। संस्कारित बच्चे घर, समाज के साथ देश की सेवा देने की बात कही। वहीं संत सियाराम ने जीवन दर्शन के महत्व को समझाते हुए इस जीवन को परमात्मा में लगाने का ज्ञान दिया। वहीं परमात्मा को आत्मा का मिलन बताया। इस दाैरान सियाराम ने भजनों से उपस्थित श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया। आयोजन समिति के कार्यकर्ता मोहनराम सारण ने बताया कि दूसरे दिन की आरती के दौरान पूर्व सरपंच नवलाराम जाखड़, पीराराम पूनिया, चैनाराम चौधरी सहित कई ग्रामीण माैजूद थे।
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