पूरे प्रदेश में अब हर ब्लॉक में बाल शिक्षा केंद्र शुरु होंगे

महिला एवं बाल विकास विभाग हर ब्लॉक के एक आंगनबाड़ी केंद्र को बाल शिक्षा केंद्र के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया है। पहले चरण में प्रदेश की 313 आंगनबाड़ी केंद्रों में बाल शिक्षा केंद्र शुरू किए हैं।


इन बाल शिक्षा केंद्रों में 6 साल तक आयु वर्ग के बच्चों को प्री-प्राइमरी शिक्षा की तैयारी कराई जा रही है। महिला-बाल विकास विभाग द्वारा प्रारंभिक बाल्यावस्था में देखरेख और शिक्षा के संबंध में दिशा-निर्देश तैयार किए जा रहे हैं। इसके माध्यम से शासकीय एवं निजी क्षेत्रों में 6 साल तक आयु वर्ग के बच्चों के समुचित विकास के लिए संचालित की जा रही प्री-प्रायमरी संस्थाओं का नियमन, निगरानी और मूल्यांकन किया जाएगा।


आंगनबाड़ी केंद्रों के बच्चों का विकास होगा
बाल शिक्षा केंद्रों में पाठ्यक्रम निर्धारण भी किया जा रहा है। जिसमें खेलकूद गतिविधियां भी कराई जा सकेंगी। यानी आंगनबाड़ी केंद्रों को बच्चों के समुचित विकास के लिए उपयोग में लाया जाएगा। आंगनबाड़ी केंद्रों में आने वाले 3 से 6 वर्ष तक आयु के बच्चों के लिए विभाग ने 19 विषयों का माहवार पाठ्यक्रम बनाया है। इसमें स्वयं की पहचान, मेरा घर, व्यक्तिगत साफ-सफाई, रंग और आकृति, तापमान एवं पर्यावरण, पशु-पक्षी, यातायात के साधन, सुरक्षा के नियम, हमारे मददगार मौसम और बच्चों का आत्म-विश्वास तथा हमारे त्यौहार शामिल हैं। 



बाल शिक्षा केंद्र में बच्चों के लिए आयु समूह के अनुसार तीन एक्टीविटी वर्कबुक तैयार की गईं हैं। बच्चों के विकास की निगरानी के लिए शिशु विकास कार्ड भी बनाए हैं। आंगनबाड़ी शिक्षा केंद्र में खेल-खेल में बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए दैनिक गतिविधियां निर्धारित की गई हैं। इसमें क्रियात्मक और रचनात्मक खेल, नाटक अथवा नकल करने वाले खेल, सामूहिक और नियमबद्ध खेल शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, बच्चे अपने मन से अकेले कुछ खेल खेलना चाहते हैं, उसे भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। इन केन्द्रों पर खेलों के आधार पर बच्चों से अलग-अलग गतिविधियां कराई जाती हैं।


पर्यवेक्षक दे रहे सहायिकाओं को प्रशिक्षण
बाल शिक्षा केंद्र में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए साल भर में कराई जाने वाली गतिविधियों का संकलन तथा मासिक और साप्ताहिक कैलेंडर की जानकारी उपलब्ध कराई है। इसमें बच्चों के विकास का अवलोकन करने के लिए आयु समूह के अनुसार शिशु विकास कार्ड बनाए हैं। आंगनबाड़ी छोड़ते समय बच्चों को प्रमाण-पत्र और प्रतिवर्ष पीएस ई किट उपलब्ध कराई जा रही है। नई व्यवस्था के लिए राज्य स्तरीय मास्टर ट्रेनर प्रशिक्षित किए हैं, जिनके द्वारा पर्यवेक्षकों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है।


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